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Friday 6 February 2009

स्वागतम

वंदे मातरम!
मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है !
मैं यहाँ पर आपके साथ अपने विचारों का आदान प्रदान करूंगा।
इसके अलावा मैं यहाँ अपनी स्वरचित हिन्दी ग़ज़लें भी प्रस्तुत करूंगा।
इन ग़ज़लों पर आपके विचार एवं टिप्पणियाँ सादर आमंत्रित हैं।

यह करो यह मत करो समझायेगी दुनिया मुझे
मैं नहीं समझा अगर खा जायेगी दुनिया मुझे

मैं जियूँगा तब तलक उलझायेगी दुनिया मुझे
मर गया तो ढूँढती रह जायेगी दुनिया मुझे

हर सफेदी ने हमेशा दूध का दावा किया
क्या पता था इस तरह छल जायेगी दुनिया मुझे

पहुँच जाने दो शिखर तक दोस्तों मुझको ज़रा
देखना फिर देखती रह जायेगी दुनिया मुझे

सच कहो तो काटने को दौड़ती दुनिया सदा
बात झूंठी बोल कर बहलायेगी दुनिया मुझे

मैं वही दुनिया वही है है वही दस्तूर सब
अब भला किस बात पर भा जायेगी दुनिया मुझे

एक दिन स्वागत किया था खूब नहला कर मेरा
एक दिन फिर प्यार से नहलाएगी दुनिया मुझे

आज "जोगेश्वर" तुम्हारी ग़ज़ल सुनते हैं सभी
एक दिन मेरी ग़ज़ल सुनावाएगी दुनिया मुझे

धन्यवाद !!

5 comments:

Veetrag said...

Nice Start Sir, keep sharing your great thoughts
Always with you
... Kumar Pal

Center for Media Research & Development said...

Kya Bat hai Sir ji

Keep it up.

Surendra
Anil
Mahendra

Ajay said...

like your poems, todays poem chutki me is fantastik in crunt politics, best of luck.

Ajay Setia

Anonymous said...

nice poim sir.
suresh naval

Maan Singh the VIth said...

It is great to know that you have created your blog, yesterday i was going through Daata hokums mobile and found your message regarding the blog and could not hold my self from connecting to net..... great initiative, i also started writing few days back on following blog www.maansinghthesixth.blogspot.com
today i am bit busy and the day i reach Baroda i will follow your blog regularly and would express my views too......

take care...

Kr. Maan Singh
(Baakra)