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Friday 9 April 2010

कुछ तो हम पागल दीवाने लगते हैं

कुछ तो हम पागल दीवाने लगते हैं
और उधर कुछ आप सयाने लगते हैं

भूखी आंतें जब जब कहती रोटी दो
नयन बावरे स्वप्न दिखाने लगते हैं

सच की कीमत एक ज़रा सा साहस हो
और झूट को रोज बहाने लगते हैं

ताऊ को जब पूछो कल क्या करना है
बीते कल की बात बताने लगते हैं

जब जब मैं चढ़ता हूँ उनकी चौखट पे
तब तब बोहरे ब्याज बढाने लगते हैं

कौन पराया हाथ बढ़ाएगा आगे
अपने ही जब आँख चुराने लगते हैं

"जोगेश्वर" ज़िंदा है कैसा अचरज है
जाने कितने रोज़ निशाने लगते हैं

7 comments:

वीनस केशरी said...

जोगेश्वर जी क्या गजल कही है पढ़ कर दिल बाग बाग हो गया

हर शेर मुकम्मल और सोचने को मजबूर करते हुए

आपकी इक उम्दा गजल

ओम पुरोहित'कागद' said...

आदरजोग गर्ग सा'ब,
जय राजस्थानी!
जय राजस्थान!!
आप री हिन्दी ग़ज़ल बांची,भोत दाय आई।
बधाई!
*एक पंचलड़ी हाजर है-
कभी कभी गुनगुनाने लगते हैँ।
कभी बेबात सुनाने लगते हैँ॥
जब कभी चलती है बात दर्दँ की।
वे जख्म अपने दिखाने लगते हैँ॥
चाक ज़िगर लिए जो घूमते हैँ।
दीवाने बहुत पुराने लगते हैँ॥
ना होँ खुश अगर खुद कभी किसी से।
तोँ दूसरोँ को सताने लगते हैँ॥
बात बात पर बहाते हैँ आंसू।
ये मरद बड़े जनाने लगते हैँ॥

Udan Tashtari said...

ताऊ को जब पूछो कल क्या करना है
बीते कल की बात बताने लगते हैं


-बहुत सही!!

bharat said...

HUMOROUS QUOTE-
TAU ko jab poochho kal kya karna hai,
Bite kal Ki BAAT Batane Lagte Hai,

Kya Baat Hai BHAISAAB,

"BUJURGO KI APNE ATIT KE SAAT LAGAAV" KI BAHUT Hi SUNDER VYAKHYA KI HAI..
Great sense Of Humor, Mind Blowing
Regards
Dr. Bharat Purohit
Adani Power Ltd

स्वप्निल कुमार 'आतिश' said...

tez dhaar hai aap ki kalam ki ...khub achhi lagi ghazal ... :) aap ko padhta rahunga..

Dr. kavita 'kiran' (poetess) said...

कौन पराया हाथ बढ़ाएगा आगे
अपने ही जब आँख चुराने लगते हैं yahi haqeeqat hai zindgi ki.bahut sunder.

anand kumar jagani said...

jogeshwarji bahut sunder baat kahi . jab jab chadhata hu unki choukhat pe tab tab bohere byaz chadhane lagete hain.