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Saturday 11 July 2009

दिल में उतरा नाम किसीका

दिल में उतरा नाम किसीका
कोई हुआ गुलाम किसीका

दिल पर लगता खंज़र जैसा
तेरे लब पर नाम किसीका

ऐसा ज़ुल्म कभी मत करना
मेरा ख़त पैगाम किसीका

सुख तो ठहरा इक बंजारा
सुबह किसीका शाम किसीका

ऐसा भी होता है यारों
मेरा दुःख आराम किसीका

इंतजाम में इतनी खामी
हाथ किसीका जाम किसीका

न्याय तुम्हारा देखा सबने
काम किसीका नाम किसीका

गायब हुई अमानत यारों
फिर से निकला राम किसीका

सब के सब बिकने को आतुर
कौन लगाए दाम किसीका

"जोगेश्वर" को इंतज़ार है
आये आज सलाम किसीका

4 comments:

रंजना said...

Waah ! waah ! Waah !!

Bahut bahut sundar rachna....ekdam man moh gayi...

ओम आर्य said...

क्या कहे भाई जी आपको, गजब कर दिये हो,...........कमाल की रचना

Udan Tashtari said...

सुन्दर!!

गंगू तेली said...

leejiye saahab salaam hamara.... aapko aur aapki kavitaai ko....

ab na kahiyega kisi ke salaam ka intjar hai..

Sunder... Bahut sunder..